एक करोड़ के लिए पत्नी को मरा हुआ दिखाया

एस.के. सोनी हॉस्पिटल के कर्मचारियों की कारस्तानी

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एक करोड़ के लिए पत्नी को मरा हुआ दिखाया

तीन महीने बाद हुआ मामले का खुलासा

 

एक करोड़ रुपए का क्लेम उठाने के लिए एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी को कागजों मार दिया। उसके बाद उसका डेथ सर्टिफिकेट बनवाया। इंश्योरेंस कंपनी में क्लेम के लिए फाइल लगा दी। मामले पर पड़ताल हुई तो पता चला ये पूरा केस गलत है। मामले का खुलासा होने के बाद जयपुर के एक प्राइवेट हॉस्पिटल ने खुद की गलती मानते हुए नगर निगम को पत्र लिखा। अब सर्टिफिकेट को निरस्त कर दिया गया है।

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नगर निगम ग्रेटर के रजिस्ट्रार (जन्म-मृत्यु) प्रदीप पारीक और उप रजिस्ट्रार लतेश गुप्ता ने मामले की जानकारी देते हुए बताया- पूरा मामला पिछले साल 4 अप्रैल 2023 का है। गुरुग्राम के मानेसर के रहने वाले जतिन अपनी पत्नी सुशीला देवी का जयपुर इलाज के लिए लाए थे। जेएलएन मार्ग स्थित एस.के. सोनी हॉस्पिटल में भर्ती करवाया। यहां उन्होंने सुशीला की कुछ जांच करवाई। फिर छुट्‌टी लेकर चले गए। इस दौरान पति-पत्नी ने हॉस्पिटल के स्टाफ से सांठ-गांठ की। सुशीला को इलाज के दौरान मृत बता दिया। उसका 6 अप्रैल 2023 तारीख का डेथ रजिस्ट्रेशन पहचान पोर्टल पर करवा दिया। इस रजिस्ट्रेशन के आधार पर 14 अप्रैल 2023 को सुशीला के पति जतिन ने नगर निगम ग्रेटर के मालवीय नगर जोन में आवेदन करके सुशीला का डेथ सर्टिफिकेट जारी करवा लिया।

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यूं आया पकड़ में मामला
डेथ सर्टिफिकेट जारी करने के 3 माह बाद जतिन ने एचडीएफसी लाइफ इंश्योरेंस कंपनी में सुशीला की पॉलिसी का एक करोड़ रुपए का क्लेम उठाने के लिए आवेदन कर दिया। क्लेम की फाइल आने के बाद इंश्योरेंस कंपनी ने पड़ताल की तो पता चला कि जिस महिला को डेथ बताकर क्लेम उठाया जा रहा है, वह जिन्दा है। इंश्योरेंस कंपनी ने पहले तो नगर निगम ग्रेटर को पत्र लिखकर सर्टिफिकेट के सत्यापन की जांच करवाई।

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इस दौरान कंपनी ने महिला के घर का दौरा किया। पता चला महिला जिंदा है। इसके बाद कंपनी के प्रतिनिधियों ने एसके सोनी हॉस्पिटल पहुंचकर पड़ताल की। मामले का खुलासा हो गया। इंश्योरेंस कंपनी के प्रतिनिधियों के पहुंचने पर हॉस्पिटल प्रशासन के होश उड़ गए।

महिला के पति द्वारा दिया गया शपथ पत्र।
महिला के पति द्वारा दिया गया शपथ पत्र।
पत्र लिखकर सर्टिफिकेट निरस्त करने का किया आग्रह

कंपनी से हुई बातचीत और मामला खुलने के बाद हॉस्पिटल प्रशासन ने इस मामले को दबाने के लिए अपने यहां से जो डेथ का रजिस्ट्रेशन पहचान पोर्टल पर किया था, उसे निरस्त किया। इसके बाद हॉस्पिटल प्रशासन ने नगर निगम ग्रेटर को एक पत्र लिखा और निगम से जारी डेथ सर्टिफिकेट को निरस्त करने का आग्रह किया। इसके बाद मार्च 2024 में डेथ सर्टिफिकेट को कैंसिल कर दिया गया।

नगर निगम ग्रेटर के रजिस्ट्रार (जन्म-मृत्यु) प्रदीप पारीक ने बताया- हमारे यहां से डेथ सर्टिफिकेट तभी जारी होता है, जब हॉस्पिटल पहचान पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन होता है। इसके अलावा श्मशान घाट और कब्रिस्तान से अंतिम संस्कार की रिपोर्ट बनकर आती है।


सर्टिफिकेट निरस्त करने के लिए भिजवाया
नगर निगम ग्रेटर के मालवीय नगर जोन की उप रजिस्ट्रार लतेश गुप्ता ने बताया- हमें हॉस्पिटल और इंश्योरेंस कंपनी का लेटर मिला है। हमने सर्टिफिकेट निरस्त करने के लिए नगर निगम मुख्यालय स्थित रजिस्ट्रार (जन्म-मृत्यु) को प्रकरण भिजवा दिया है।

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